The Way I Felt ..

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Paarth Dixit


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ऑनर किलिंग “रिश्तों का क़त्ल” ! “Jagran Junction Forum”

Posted On: 4 Nov, 2011  
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ईमानदारी और राष्ट्रहित भी है गुनाह !

Posted On: 20 Oct, 2011  
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रथ-यात्रा “Jagran Junction Forum”

Posted On: 18 Oct, 2011  
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गरीब कौन ? “Jagran Junction forum”

Posted On: 27 Sep, 2011  
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गरीबो का मजाक उड़ाती गरीबी की नयी परिभाषा !

Posted On: 22 Sep, 2011  
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अँधा क़ानून !

Posted On: 17 Sep, 2011  
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लोकल टिकेट में

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आज खुश होगी निर्भया !!

Posted On: 13 Sep, 2013  
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Hindi News Others Others social issues में

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कहाँ गयी वो धार..??

Posted On: 11 Jan, 2012  
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कमेन्टटेरिया के लक्षण एवं उपचार !

Posted On: 16 Nov, 2011  
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काहे का उपवास काहे की सदभावना !

Posted On: 20 Sep, 2011  
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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

पार्थ दीक्षित जी अच्छा रहा यह सुझाव आप का ... गांव में मिल कर भाईचारे के साथ रहना..सभी लोगो से वार्तालाप करते रहना और खुश होकर जीवन को व्यतीत करना.. संतोषम परम सुखं अति सर्वत्र वर्जयेत ....भी याद रखना चाहिए कोई कोई हमारे भाई हायपर वाले बहुत दिनों तक कुछ मन में आये भी तो पोस्ट नहीं करते भोजन की तलाश में बैठे रहते हैं ..हम यहाँ अपनी बात साझा करने के लिए हैं पढने के लिए हैं और जानकारी एकत्रित कर समाज को एक नयी दिशा देने हेतु कुछ योगदान देने हेतु हैं .... कभी आप किसी के घर में जाओ और वो आप को मान सम्मान न दे तो भी मन को लगता है की इतने बार इसके यहाँ आये गए ये अच्छा बुरा तक नहीं बोलता .... कभी किसी को देख ये लगता है की आप इससे कितना भी सम्बन्ध रख ले ये तो सब डकार जाएगा आप के यहाँ हल्दी फूल डालने भी नहीं आएगा ... सब से अच्छी बात तो ये है जो संदीप वाहिद काशी वासी भाई ने कही की चाहे जो हो यदि आप के मन को उसका विचार भाया या देश समाज के हित का है तो उसे समर्थन अवश्य करें ...आप की नयी पोस्ट पर कमेन्ट नहीं जा रहा ... सुन्दर लेख ...आप का भ्रमर ५

के द्वारा: surendra shukla bhramar5 surendra shukla bhramar5

पार्थ दीक्षित जी अच्छा रहा यह सुझाव आप का ... गांव में मिल कर भाईचारे के साथ रहना..सभी लोगो से वार्तालाप करते रहना और खुश होकर जीवन को व्यतीत करना.. संतोषम परम सुखं अति सर्वत्र वर्जयेत ....भी याद रखना चाहिए कोई कोई हमारे भाई हायपर वाले बहुत दिनों तक कुछ मन में आये भी तो पोस्ट नहीं करते भोजन की तलाश में बैठे रहते हैं ..हम यहाँ अपनी बात साझा करने के लिए हैं पढने के लिए हैं और जानकारी एकत्रित कर समाज को एक नयी दिशा देने हेतु कुछ योगदान देने हेतु हैं .... कभी आप किसी के घर में जाओ और वो आप को मान सम्मान न दे तो भी मन को लगता है की इतने बार इसके यहाँ आये गए ये अच्छा बुरा तक नहीं बोलता .... कभी किसी को देख ये लगता है की आप इससे कितना भी सम्बन्ध रख ले ये तो सब डकार जाएगा आप के यहाँ हल्दी फूल डालने भी नहीं आएगा ... सब से अच्छी बात तो ये है जो संदीप वाहिद काशी वासी भाई ने कही की चाहे जो हो यदि आप के मन को उसका विचार भाया या देश समाज के हित का है तो उसे समर्थन अवश्य करें ... सुन्दर लेख ...आप का भ्रमर ५

के द्वारा:

प्रिय पार्थ जी, अच्छा प्रयास रहा आपका। फ़िलहाल तो आपसे यही कहूँगा कि इस मंच पर अनेक ऐसे लेखक हैं जिन्हें गाहे-बगाहे इक्के-दुक्के कमेन्ट ही मिल पाते हैं मगर इसके कारण उनकी रचनाधर्मिता नहीं बाधित होती। ऐसा ही होना भी चाहिए। मैंने आज तक गिनती के ही पोस्ट्स पर अनिच्छा से कमेन्ट किया होगा अन्यथा मैं कोई लेख अथवा कविता पढ़ता हूँ अगर वो मेरी समझ के बाहर का है तो मैं उस पर प्रतिक्रिया नहीं देता। अन्य ब्लॉगरों के पोस्ट पर कमेन्ट किसी प्रत्याशा में नहीं देने चाहिए अपितु यदि आपको उनका लेखन पसंद आया है तो ही दें। आप लोग इस मंच के ऊँचाई के वक़्त में इससे जुड़े हैं हम लोग जब पहली बार आये थे तो कम से कम ५-६ पोस्ट्स तक तो प्रतिक्रियाओं के दर्शन ही दुर्लभ होते थे। मंच पर मेरी पहली प्रस्तुति पर मुझे केवल २ कमेंट्स मिले थे और अगले चार-पांच लेखों तक तो मेरा यही हाल रहा था पर इससे विचलित होने का सवाल ही पैदा नहीं होता था। कमेंट्स के धुरंधर इस मंच पर तीन लोग हैं - निशा जी जिन्हें सर्वाधिक कमेंट्स प्राप्त ब्लॉगर का दर्ज़ा प्राप्त है, राजकमल भाई जो ढूंढ-ढूंढ कर नए ब्लॉगरों का प्रोत्साहन करते हैं और साथ ही स्वयं भी कमेन्ट रुपी प्रेम से सराबोर हो जाते हैं और तृतीय हैं अबोध बालक जी (जिन्होंने ने मेरे ब्लॉग पर पहला कमेन्ट दिया था) वे हर किसी को तटस्थ भाव से प्रतिक्रिया देते हैं। लेखन की इस विधा में आपकी लेखनी को और अधिक धार मिले इसी कामना के साथ,

के द्वारा: वाहिद काशीवासी वाहिद काशीवासी

प्रिय पार्थ जी ..... सप्रेम नमस्कार ! आपका यह पहला ही प्रयास अच्छा है ..... अगर आप मेरा पहला वयंग्य पढ़ेगे तो अपना सर धुनेंगे की एक अच्छे भले शायर को यह क्या सूझी थी वयंग्य लिखने की .... लेकिन मैंने एक बार जो शुरुआत की तो फिर वापिस पीछे मुड़ कर नहीं देखा ..... उस लिहाज से आपने कई गुणा ज्यादा अच्छा आगाज लिया है ..... अब मैं कह सकता हूँ की जब आगाज ऐसा है तो फिर अंजाम कैसा होगा ...... हम सभी को आपके इस नए सफर का साक्षी होने का सोभाग्य प्राप्त होगा ..... यह हमारे लिए फख्र की बात है ..... आज बहुत दिनों के बाद किसी लेख में मेरा नाम आया है –इससे मेरी भी भूख कुछ समय के लिए शांत हो गई है –लेकिन आपके अगले वयंग्य को पढ़ने की जाग गई है .... अग्रिम रूप से शुभकामनाये :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/11/11/राजकमल-इन-पञ्चकोटि-महामण/

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

प्रिय पार्थ जी ..... सप्रेम नमस्कार ! आपका यह पहला ही प्रयास अच्छा है ..... अगर आप मेरा पहला वयंग्य पढ़ेगे तो अपना सर धुनेंगे की एक अच्छे भले शायर को यह क्या सूझी वयंग्य लिखने की .... लेकिन मैंने एक बार जो शुरुआत की तो फिर वापिस पीछे मुड़ कर नहीं देखा ..... उस लिहाज से आपने कई गुणा ज्यादा अच्छा आगाज लिया है ..... अब मैं कह सकता हूँ की जब आगाज ऐसा है तो फिर अंजाम कैसा होगा ...... हम सभी को आपके इस नए सफर का साक्षी होने का सोभाग्य प्राप्त होगा ..... यह हमारे लिए फख्र की बात है ..... आज बहुत दिनों के बाद किसी लेख में मेरा नाम आया है –इससे मेरी भी भूख कुछ समय के लिए शांत हो गई है –लेकिन आपके अगले वयंग्य को पढ़ने की जाग गई है .... अग्रिम रूप से शुभकामनाये :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

के द्वारा:

प्रिय पार्थ भाई ,.सस्नेह नमस्कार आपका प्रयास बहुत अच्छा लगा ,..सबसे अच्छा लगा बीमारी का नाम ,..लगातार लिखें अवश्य ही लेखन बेहतर होगा ,...... वैसे तो साहित्य से मेरा दूर दराज तक कोई रिश्ता नाता नहीं है ,.. पीढियो तक मुझे कोई नहीं याद ....ना ही मुझे कोई ज्ञान है ...फिर भी अपनी बात आपसे जरूर कहूँगा ....मेरे हिसाब से व्यंग्यकार को छतरी नहीं लगानी चाहिए ...आपने तो गुरुदेव का बंकर ही बना लिया ..... ..और भाई मैं कहाँ डॉ .बन सकता हूँ ,..यदि मेरे और गुरुदेव के बीच कोई अस्पताली रिश्ता बन सकता है..तो वो है रेसिडेंट डॉ. और परमानेंट मरीज का ......वो मरीज जो डॉ. को आशा से देखता है कि इसबार कोई संजीवनी बूटी देगा ,...और डॉ. सोचता होगा ...पता नहीं इससे कब छुटकारा मिलेगा ......!!!! मैं पूरी आशा करता हूँ ,.आपका अगला व्यंग्य इस मंच से सम्बंधित नहीं होगा ,...इसके लिए बहुत कुशाग्रता , शोध ,.मेहनत ,...और तीसरी आँख की जरूरत होती है ,...जो फिलहाल गुरुदेव के अलावा शायद ही किसी के पास हो ,...एक परमगुरु हैं ,..शायद तात्कालिक संन्यास पर हैं ,...उम्मीद करता हूँ जल्द उबटन (बुकवा) लगवा वो हमें कृतार्थ करेंगे ,... सुन्दर प्रयास पर आपको हार्दिक बधाई , आत्मिक शुभकामनाये

के द्वारा: Santosh Kumar Santosh Kumar

चन्द्र पाल जी मै व्यक्तिगत रूप से मोदी जी की कार्य शैली का प्रशंसक हूँ गुजरात की प्रगति मोदी जी की कार्य कुशलता का प्रतीक है पर भारत सिर्फ गुजरात तक ही सीमित नहीं है..मोदी जी का सदभावना मिशन तभी अर्थपूर्ण होगा जब वो गुजरात जैसे विकास के लिए देश की जिम्मेदारी हाथ में लेने की पहल करे और उसका हौसला जताए...सवाल ये नहीं है कि इस बच्चे की तस्वीर गुजरात की है या कही और की..सवाल ये है की ये तस्वीर भारत के लाचार बचपन की है..और यकीन मानिये की जब भी ऐसा कुछ नज़र के सामने से गुज़रता है तो भले ही निवाला हलक से नीचे उतर जाए पर ये निवाला एक गुनाह सा लगता है..और वो इसलिए की मै किसी राजनीतिक विचारधारा का समर्थक नहीं हूँ बल्कि मानवता का और भारतीयता का समर्थक हूँ.. AND I MEAN IT FROM INNER CORE OF MY HEART.. धन्यवाद भाई..

के द्वारा: Paarth Dixit Paarth Dixit

के द्वारा: manoranjanthakur manoranjanthakur

आदरणीय अशोक जी नमस्कार, आखिर करे भी तो क्या जैसे ये खबर मैंने देखी सच बताऊ मेरा खून खौल उठा ३२ और २६ रुपय से ज्यादा तो एक भिकारी कमा लेता है तो इसका मतलब वह गरीब नहीं और मनरेगा में मजदूरी करने वाले व्यक्ति को १२० रूपए प्रतिदिन मजदूरी मिलती है ऐसे तो वह भी गरीब नहीं है..इस देश की ९० प्रतिशत जनता ३२ और २६ रूपए कमा लेती है अगर ३२ और २६ रूपए प्रतिदिन कमाने वाला व्यक्ति गरीब नहीं होता है तो इस देश से गरीबी न जाने कब मिट चुकी होती..आपने बिलकुल सत्य कहा इनके मंत्री सिर्फ सफाई देते ही नज़र आते है..और करे भी तो क्या करे इसके पहले इनकी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने सुझाव रखा था १५ और २० रूपए कमाने वाला गरीब नहीं है तब इन्हें सुप्रीम कोर्ट ने लताड़ के भगा दिया था...इतने भ्रष्टाचार के खुलासे और बढती हुई महंगाई..आखिर सफाई नहीं देंगे तो करेंगे क्या लेकिन अब सफाई देने से कुछ नहीं होने वाला "ये पब्लिक है ये सब जानती है"..प्रतिपुष्टि के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद...

के द्वारा: Paarth Dixit Paarth Dixit

जब राजीव गाँधी को एक बार पीडितो को टूटे हुए मकानों का मुआवजा देना था तो उस ईमानदार आदमी के मुंह से यह निकल गया था की सरकार का आंकलन तो कच्चे घास फूस के झोंपडो का ही होता है इस लिए कम मुआवजा मिलता है ..... लेकिन अफ़सोस की उस कम में से भी 95 % दूसरे लोग खा जाते है ..... े मुझको आपके लेख से मुझको उस पुरानी बात की याद आ गई ..... इसलिए मेरा मानना है की जब सरकारी नीतिया और आकलन वोही पुराने ढाक के तिन पात वाली ही रहनी है तो कोई भी सरकार किसी भी पार्टी की हो सभी गरीबो का नजाक ही उड़ायेंगी ..... वैसे अगर यह रिपोर्ट अगर न पेश की जाती तो देश का क्या नुक्सान हो जाता ? भगवान ही सदबुद्धि दे इन अक्ल के अंधे सियासतदानों को ताकि इस देश का और जनता का कुछ तो भला हो सके आगे जो भी भगवान और अन्ना जी की मर्जी जय हिंद

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

यह एक आमजन की सहज प्रवति है ..... हम खुद कालेज के जमाने में इस नियम का पालन करते रहे है यह बात अलग है की अब ऐसी नोबत आम तौर पर नहीं आती क्योंकि फ्लाईओवर तथा अंडर ब्रिज अब काफी जगह पर बन गए है ..... और जिनको अपने जीवन से प्यार है वोह इन्तजार करना बेहतर समझते है ..... हमारे सामने की ही देखि हुई घटना है की एक कालेज की लड़की अपने मोबाइल पर बाते करती हुई लाइन क्रास करती चली जा रही है .....एक साइड से गाड़ी आ रही है - सभी लोग चीख -२ कर उसको सावधान कर रहे है लेकिन उसके सर पर बैठा काल उसको हरेक आवाज से बेखबर रखते हुए गाड़ी के इंजन के सामने ले आया ..... पुलिस वालो की फोटो तो आप अखबार वालो को भी भेज सकते है :) :( ;) :o 8-) :| http://rajkamal.jagranjunction.com/2011/09/18/“जब-जागरण-गांव-की-सभी-शादी/

के द्वारा: Rajkamal Sharma Rajkamal Sharma

के द्वारा: Paarth Dixit Paarth Dixit




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